
सुबह का वक्त
लगभग से 8 बजे महर की आंखें खुली और उसने हल्की सी अंगड़ाई ली! अब उसकी नजर सीधा आरांश पर गई जो उसके बगल में ही सोया हुआ था, उसे देखकर उसके होठों पर हल्की सी मुस्कुराहट आ गई थी क्योंकि कल रात की झलकियां उसकी आंखों के सामने चलने लगी थी!


सुबह का वक्त
लगभग से 8 बजे महर की आंखें खुली और उसने हल्की सी अंगड़ाई ली! अब उसकी नजर सीधा आरांश पर गई जो उसके बगल में ही सोया हुआ था, उसे देखकर उसके होठों पर हल्की सी मुस्कुराहट आ गई थी क्योंकि कल रात की झलकियां उसकी आंखों के सामने चलने लगी थी!

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