
जैसे ही संगम के होठ चित्रांशी को अपने थाई पार्ट्स पर महसूस हुए उसने अपनी आंखें बंद कर ली थी और उसकी सिसकियां निकलने लगी थी, संगम के लिए तो वैसे ही अब उसकी धड़कनें बढ़ने लगी थी! धीरे-धीरे उसके दिल में संगम के लिए एहसास आने लगे थे और पीने के बाद तो संगम और भी ज्यादा अट्रैक्टिव लगता था, उसकी हरकतें मदहोशी भरी होती थी लेकिन उतनी ही ज्यादा वो चित्रांशी को सुकून और प्यार सा भी महसूस करवाती थी! उसके पेट में तितलियां उड़ने लगती थी, ऐसे में अब चित्रांशी भला खुद को संभाले भी तो संभाले कैसे?























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