
मित्तल मेंशन के पार्किंग एरिया में,
अंगद की गाड़ी आकर रुकी। स्नेहा और अंगद दोनों गाड़ी से बाहर आए। स्नेहा धीमे-धीमे चल रही थी क्योंकि उसके पैर में चोट लगी थी, जबकि अंगद तेज कदमों से अंदर की तरफ आ गया। घर के बाकी लोग खाना खाकर अपने-अपने कमरे में जा चुके थे। हर कोई अंगद और स्नेहा के बारे में पूछ रहा था, लेकिन शारदा जी ने सबको बता दिया था कि वे दोनों बाहर घूमने गए हैं। वो सबको परेशान नहीं करना चाहती थीं, लेकिन उन्हें खुद नींद नहीं आ रही थी, इसलिए वो बाहर हॉल में बैठी थीं। कम से कम 15-20 बार वो अंगद को फोन कर चुकी थीं, लेकिन अंगद उनका फोन नहीं उठा रहा था।























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