
शारदा जी हैरानी से सुमित्रा जी की तरफ देख रही थी। वो चौंकते हुए बोली "मुझे नहीं पता था सुमित्रा तुम्हारे अंदर इतनी नफरत भरी होगी”
सुमित्रा अभी भी गुरुर से बोली "अभी तो आपने मेरी नफरत देखी ही कहा है शारदा भाभी… अभी तो आपका मेरी नफरत देखना बाकी है और आपको क्या लगता है कि अगर आपको सच पता चल गया तो मैं अपनी हरकतें बंद कर दूंगी.. बिल्कुल भी नहीं… अब तो इस सुमित्रा के अंदर जल रही आज तभी शांत होगी जब मैं भी आपकी खुशियों को पूरी तरह से बर्बाद कर दूंगी… जिस तरह से आपने मेरी जिंदगी हराम की है!! मैं भी आप लोगों का सुख चैन सब छीन लूंगी!! बहुत उम्मीद है ना आपको स्नेहा से… देखिएगा बद्दुआ लगेगी उसे मेरी और जैसे संगम को जन्म देते वक्त तनुश्री की मौत हुई… वैसे ही इस बार ना स्नेहा बचेगी और ना ही स्नेहा का होने वाला बच्चा!”























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