
मित्तल मेंशन,
शारदा जी की बातें सुनकर जहां स्नेहा का चेहरा एकदम खिला हुआ था, वही सुमित्रा जी के चेहरे को देखकर ही साफ पता चल रहा था कि उनके अंदर इस वक्त कितनी आग लगी हुई है लेकिन फिलहाल उन्हें लंबा सोचना था! अभी उन्हें कुछ नहीं कहना था क्योंकि अंगद से अब उन्हें थोड़ा बचकर रहना था इसलिए वो उसके साथ कोई बहस नहीं करने वाली थी!























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