
स्नेहा की गोद भराई की रस्म चल रही थी और सब औरतों का नाच गाना चल रहा था, सबने स्नेहा को शगुन दे दिया था! अनुपमा जी ने भी स्नेहा को बहुत कुछ दिया था और शारदा जी ने भी…
स्नेहा तो इतना सब कुछ संभाल भी नहीं पा रही थी, उसने वो सब कुछ अब आभा को दे दिया था और आभा ही सब चीजों को अंदर रखवा रही थी! उनमें काफी कीमती सामान भी था और वहां बाहर से लोग आए हुए थे जैसे कैटरिंग वाले, डेकोरेशन वाले तो किसी भी चीज को ऐसे नहीं रखा जा सकता था।























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