
स्नेहा की शिकायतों के बारे में सुनकर अंगद ने तुरंत उसे अपने सीने से लगाया और बोला "तुम जितनी शिकायतें करोगी मैं सब सुनने को तैयार हूं स्नेहा, बस मुझे छोड़कर मत जाना!”
स्नेहा ने भी अपने हाथों को उसकी पीठ पर पूरी तरह से कस दिया था और रोते हुए बोली "अब नहीं जाऊंगी अंगद जी! बिल्कुल नहीं जाऊंगी, एक पल के लिए भी अब मैं आपसे दूर नहीं जाऊंगी!”























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