
एक खूबसूरत रात बीत चुकी थी! सुबह का वक्त था और लगभग से 5 बजे हुए थे, अभी उस विला में अंधेरा था क्योंकि पूरी तरह से दिन नहीं हुआ था!
स्नेहा अंगद की बाहों में सिमटी हुई थी, अंगद ने अभी आधे घंटे पहले ही उसे छोड़ा था जिसके बाद स्नेहा तो थक कर सो गई थी लेकिन अंगद अभी भी जाग रहा था और अब उसने स्नेहा पर एक पर्दा लपेटते हुए उसे अपनी बाहों में उठाया और फिर उसे लेकर अंदर की तरफ आ गया!























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