
सुबह का वक्त
अंगद और स्नेहा दोनों बिस्तर पर सोए हुए थे और अब स्नेहा की आंखें खुली, आंखें खोलते ही उसके होठों पर मुस्कुराहट थी क्योंकि उसके सामने अंगद का चेहरा था जो खुद भी मुस्कुराते हुए उसकी तरफ ही देख रहा था।


सुबह का वक्त
अंगद और स्नेहा दोनों बिस्तर पर सोए हुए थे और अब स्नेहा की आंखें खुली, आंखें खोलते ही उसके होठों पर मुस्कुराहट थी क्योंकि उसके सामने अंगद का चेहरा था जो खुद भी मुस्कुराते हुए उसकी तरफ ही देख रहा था।

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