
सृष्टि तो पाखी को देखकर हैरान हो रही थी कि वो कैसे बात कर रही है, हालांकि पाखी बड़बोली तो हमेशा से ही थी! किसी के लिए भी वो कभी भी कुछ बोल देती थी लेकिन यहां तो उसका अलग ही रूप नजर आ रहा था, कहां सृष्टि सोच रही थी कि वो कितनी मायूस होगी! पता नहीं जब वो सुबह उठेगी तो कितना रोएगी लेकिन यहां तो पाखी को देखकर ऐसा लग रहा था जैसे उसे कोई फर्क ही नहीं पड़ा और अब उसके बताने पर पाखी सीधा दीप्ति के रूम की तरफ ही बढ़ गई थी!





















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