
यशोदा जी संगम की तरफ देख रही थी जो अब सीढ़ियां चढ़ते हुए चित्रांशी के रूम की तरफ बढ़ गया था, चित्रांशी अपने रूम में थी और बेड पर औंधे मुंह लेटकर रोए जा रही थी! उसकी आंखों से आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे…


यशोदा जी संगम की तरफ देख रही थी जो अब सीढ़ियां चढ़ते हुए चित्रांशी के रूम की तरफ बढ़ गया था, चित्रांशी अपने रूम में थी और बेड पर औंधे मुंह लेटकर रोए जा रही थी! उसकी आंखों से आंसू रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे…

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