
प्रणय के सवाल पर पाखी के चेहरे का रंग उड़ गया था, वो उससे पूछ रहा था कि कौन सी गड़बड़? पाखी इस वक्त सृष्टि के बारे में सोच रही थी और उसे लग रहा था कि कोई ना कोई गड़बड़ जरूर है! सृष्टि की याददाश्त सच में नहीं गई है, ऐसा तो वो नहीं सोच रही थी लेकिन उसे कुछ तो ठीक नहीं लग रहा था इसीलिए उसने गड़बड़ शब्द अपने होठों से निकाला था लेकिन प्रणय उस शब्द को पकड़ लेगा उसने सोचा नहीं था!





















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