
जैसे ही अंगद ने स्नेहा को किस करना शुरू किया, उसे ऐसा लगा जैसे उसकी जन्मों जन्मों की प्यास खत्म हो गई हो, अंगद उसे बेहद पैशनेटली किस कर रहा था! स्नेहा भी कहां खुद को रोक सकती थी? उसने भी तुरंत अपने होठों को खोला और फिर अंगद को पूरी तरह से रिस्पांस देने लगी!
उन दोनों के होठ पूरी तरह से एक दूसरे के ऊपर हावी होने की कोशिश कर रहे थे, कभी अंगद के दोनों होठ स्नेहा के लोअर लिप को अंदर की तरफ दबा रहे थे तो कभी स्नेहा अपने होठों से अंगद के होठों को दबाने की कोशिश कर रही थी।
ऐसा लग रहा था जैसे दो गुलाब के फूल आपस में एक दूसरे का रस पीने की कोशिश कर रहे हैं!
अंगद ने स्नेहा के होठों को छोड़ा और फिर उसकी तरफ देखते हुए बोला "मुझे लगता है मुझसे ज्यादा भूखी तो आज तुम हो रही हो!”
स्नेहा भी तुरंत बोली "जितना आपने परेशान किया है इतना भूखा होना तो बनता है!”
अंगद झट से बोला "मतलब आज मेरी मासूम सी चुहिया एकदम जंगली बिल्ली बनने वाली है?”




















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